माँ जैसा कोई नहीं 🌸🌸🌸

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

घर के कोने कोने में बसा एहसास है मां
तेरे भीतर ही ईश्वर का वास है मां।

अंधेरी रात में दिये का उजाला है मां
रेगिस्तान में शीतल जल का प्याला है मां।

तपती धूप में राहत की छाया है मां
मुझ पर रक्षा कवच तेरा साया है मां।

तेरा बोल मिश्री से भी मीठा लगता मां
तेरा स्पर्श फूलों से भी कोमल लगता मां।

तू ईश्वर का मीठा प्रसाद है मां
तेरे हाथों में जादू सा स्वाद है मां।

तू भगवान् की अर्चना पूजा है मां
तुझसा नहीं इस जग में कोई दूजा है मां।

—रंजना माथुर दिनांक 07/10/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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