माँ की सीख – बेटी की टीस

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Sumita R Mundhra

रचनाकार- Sumita R Mundhra

विधा- कविता

सौ.सुमिता राजकुमार मूंधड़ा

माँ की सीख – बेटी की टीस
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कदम उठे गलत अगर मेरे,
तो मैं सहम – सी जाती हूँ।
माँ तेरी सीख याद आ जाती,
कुछ गलत नहीं कर पाती हूँ।।

दुष्कर्मों की सजा मिलती है,
दोजख सी जिंदगी कटती है।
चुकाना पड़ता लिया दिया सब,
यह सीख भूल नहीं पाती हूँ ।।

उनकी माँ ने भी सिखाया होगा,
पाठ उन्हें भी यह बचपन से,
भूल गये क्यूँ कद बढ़ते ही,
इस पाठ को अपने जीवन से।।

देते हैं तकलीफ मुझे वो,
आहत वाणी से करते हैं।
ना करती प्रतिवाद मैं उनका,
ना ही वो ईश् से डरते हैं।।

माँ तेरी सीख बड़ी निर्मल है,
पर मैं सहमी – सी रहती हूँ।
संतोष तो रहता है मन में,
पर सुकून को तरसती हूँ।।

यह क्या सीख है माँ तेरी,
कि बस ईश् पर विश्वास करु,
देर है अँधेर नहीं है वहाँ,
समय का मैं इंतजार करूँ।।

– सौ. सुमिता राजकुमार मूंधड़ा

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Sumita R Mundhra
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मैं बड़ी लेखिका-कवियत्री नहीं हूँ । बचपन से ही शौक से लिखती हूँ । लंबे अंतराल के बाद हमसफ़र राज और पुत्र रिषभ के प्रेरित करने पर मेरी कलम फिर से शब्दों को पिरोने लगी है । मैं अपनी रचना "माँ की सीख-बेटी की टीस" अपने मम्मी-पापा को समर्पित करती हूं । विभिन्न पत्रिकाओं में लेख और कवितायें प्रकाशित होते हैं। - सौ. सुमिता राजकुमार मूंधड़ा । sumitamundhra@gmail.com "मेरी कलम से - मेरी कवितायें"

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