माँ की याद

Priyanshu Kushwaha

रचनाकार- Priyanshu Kushwaha

विधा- कविता

कविता-
माँ की याद
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तेरी यादों की छाओं में,
मै सोया भी करता था।
तेरे आंचल में अपने आंसू,
मै धोया भी करता था।

तेरी उन लोरियों को मां,
बहुत अब याद करता हूं।
बस उन्हीं को याद कर,
रात-दिन फरियाद करता हूं ।

तेरी उन रोटियों को बस अब,
ख्वाबों में ही खाता हूं।
कभी-कभी तेरी याद में मां,
मै भूखा ही सो जाता हूं ।

जब तक मै तेरे पास था,
तेरी गोद में सोता था।
अपने हर आसुओं को मां,
तेरे से ही रोता था।

तब मेरा दर्द सुनकर मां,
तू नाखुश हो जाती थी।
और मेरे रोने पर तू,
बहुत भावुक हो जाती थी।

जीवन में कुछ करने का मां,
मै सपना बनाया हूं।
आज इसलिये तुझे छोड़ कर ,
मैं तुझसे दूर आया हूं।

तेरे बिन दूर मां अब मै,
यहां रह नहीं सकता।
तेरे से दूर रहने का दर्द,
ज़रा भी सह नहीं सकता।

कसम तेरी है मेरी मां,
मै वो सपने करूगा पूरा।
किया वायदा था जो तुझसे,
रह गया था जो अधूरा।

— प्रियांशु कुशवाहा,सतना,(म.प्र.)
मो. 9981153574

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Priyanshu Kushwaha
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निवास- आर . के. मेमोरियल स्कूल के पास हनुमान नगर नई बस्ती सतना (म.प्र) शिक्षा- अपनी विद्यालयी शिक्षा सतना जिले में स्थित केन्द्रीय विद्यालय क्र.१, से प्राप्त की। वर्तमान में शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बी.एस.सी.(प्रथम वर्ष)के छात्र हूं । विधा- मुख्य रुप से श्रृंगार रस पे लिखना पसन्द करता हूं परन्तु वर्तमान परिदृश्य को देख लगभग सभी विधाओ पर कलम को मोड़ना पड़ता है । संपर्क -९९८११५३५७४
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