माँ का हीरो****

Dinesh Sharma

रचनाकार- Dinesh Sharma

विधा- कविता

पढ़ ले बेटा पढ़ ले
कुछ कर ले
काम आयेगा
नहीं तो रह जायेगा
जीरो
मास्टर जी के गूंजते
ये शब्द….
सच में रुला देते थे
भारी कदमो से लौटते
स्कूल से घर,
दस में से दो या तीन
मिले नम्बर के साथ
ऊपर से बाप की डांट-
फटकार,
माँ का बचाना-सहलाना और
दुलार,
सच में हिम्मत देती थी
उसका कहना कौन कहता है
तुझको जीरो,
तू तो है मेरा हीरो
सुनकर ये फुल जाता था
ख़ुशी से सिना,
बुरी नजर से बचाता था
माँ का लगाया काला टिका
जो आज भी बचा रहा है
बुरी नजर से
माँ की दी दुआएँ के साथ,
काला टिका*
कुछ भी हो था तो अपनी माँ का
हीरो*

*****दिनेश शर्मा*****

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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