महिला

Pravin Tripathi

रचनाकार- Pravin Tripathi

विधा- गज़ल/गीतिका

🙏🏵 *अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर मातृशक्ति को नमन करते हुए एक रचना प्रस्तुत करता हूं.* 🏵🙏

*जिस कोख से सबने जन्म लिया, मैं उसकी बात सुनाता हूं,*
*बिन जिसके यह जग, जग ना होता, मैं गीत उसी के गाता हूं।*

*है कौन सा कोना दुनियां में, जिसमें वह हरदम मौजूद न हो,*
*कन्धों पर जिसके विश्व टिका, उस नारी को सलाम बजाता हूं।*

*दिनरात एक कर देती जो, संतति का हो उज्ज्वल भविष्य,*
*खुद के लिए कुछ भी ना मांगे, उस माँ को शीश नवाता हूं।*

*अपने हिस्से की रोटी भी, जो न्योछावर कर दे भाई पर,*
*रूठने मनाने वाली हर बहना की, रक्षा मैं करना चाहता हूं।*

*जीवन भर अपने संगी पर, बलिदान करे सब खुशियों को,*
*उस धर्मसंगिनी प्रियतम की, मुस्कान पर सर्वस्व लुटाता हूं।*

*संगी की रक्षा उन्नति निश्चित हो, व्रत उपवास अनेकों रखती है,*
*बदले में जीवन की सारी खुशियां, मैं उसे दिलाना चाहता हूं।*

*बिन नारी के नर ना होता, और ना ही यह दुनिया होती,*
*जो इक पहिये पर चल निकले, ना ऐसी कोई गाड़ी होती,*

*संसार की उन्नति, पालन पोषण में, है जिसका अनुपम योगदान,*
*उस शक्तिस्वरूपा नारी समक्ष, मैं फिर से शीश नवाता हूं।*

*प्रवीण त्रिपाठी*
*08 मार्च 2017*

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Pravin Tripathi
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एक नवागत काव्यकार, जो वरिष्ठ रचनाकारों की संगति में सीखने का इच्छुक है।

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