मर्यादा

अनिल कुमार मिश्र

रचनाकार- अनिल कुमार मिश्र

विधा- कविता

अब कहाँ हैं बुद्ध गौतम
तम ही तम सर्वत्र है
अन्याय की बंशी सुनो
यह यत्र है और तत्र है।

नवजात की लाशें हैं बिखरी
कूड़ों के ढेर में
श्वान उनको है बचाता
क्या विधि का लेख है!

कितना गिरेगा यह मनुज
दुःख बड़ा है,पीर है।
क्या क्या करेंगे संत जग में
मर्यादा नहीं गंभीर है।

Views 1
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
अनिल कुमार मिश्र
Posts 17
Total Views 224
अनिल कुमार मिश्र विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित काव्य संकलन'अब दिल्ली में डर लगता है'(अमेज़न,फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध) अशोक अंचल स्मृति सम्मान 2010 लगभग 20 वर्षों से शिक्षण एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन सम्प्रति प्राचार्य,सी बी एस ई स्कूल निरंतर मुक्त लेखन आपके स्नेह का पात्र संपर्क-9576729809 itsanil76@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia