* मर्द *

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

मर्द कभी नारी को बेइज्जत नहीं करते ।
अपनी माँ की कोख को शर्मसार नहीं करते ।।
मर्द होने का दावा तो बहुत से लोग करते हैं ।
मर्द वही जो नारी पर अत्याचार नहीं करते ।।

मर्द हो तो मर्दानगी का हक़ अदा करो ।
नारी के हिस्से का सम्मान अदा करो ।।
झूठे दिखावे से कोई मर्द नहीं बन जाता ।
मर्द हो तो नारी के दूध का कर्ज अदा करो ।।

झूठा रौब दिखाना कहाँ की मर्दानगी है ?
कमजोर को दबाना कहाँ की मर्दानगी है ?
मर्द हो तो नारी को सुरक्षा प्रदान करो ।
खेलना नारी की इज्जत से कहाँ की मर्दानगी है ?

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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