मन

ANURAG Singh Nagpure

रचनाकार- ANURAG Singh Nagpure

विधा- गीत

मन से मन के दीप जला लो
मन से मन को फिर महका लो
मन से मन का मेल जो होगा
हो जायेगा जग उजियारा..
मन से सच्ची बात कहो तुम मन से छल मत करो कभी तुम मन होता है बड़ा मतवाला
मन से मिलता ऊपरवाला…
मन में बैर न पालो भाई
मन से समझो पीर पराई
मन अभिमानी दोष की जड़ है
मन कीचड़ में एक कमल है…
ईश्वर होता है बड़े मनवाला भरता जो मन में प्रेम का प्याला मन से सच्चा प्रेम करो तुम मिल जायेगा मीत मनवाला…

मन मीरा है मन इक राधा
मन मोहन है मन इक राजा
मन से जब जब मीरा रोती
मन मोहन के पास वो होती…

मन से मन के दीप जला लो…@अनुराग©

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