मन से मन का मेल , क्या यहीं प्रीति है

डॉ मधु त्रिवेदी

रचनाकार- डॉ मधु त्रिवेदी

विधा- कविता

मन से मन का मेल ,क्या यहीं प्रीती है।
दिल से दिल का मेल ,क्या यही रीति है॥

राधा ने देखा ज्यों ही,मन के दीप जल उठे।
लबों से भाव उतरते ,तन की भाषा जाग उठी॥

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डॉ मधु त्रिवेदी
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