मन में ख्यालों के

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌹🌹🌹🌹
मन में ख्यालों के
बुल बुले उठटते हैं।
कुछ सुलझे,
कुछ अनसुलझे हैं।
🌹
कुछ दिलों में सूल बनकर।
तो कुछ खिलते फूल बनकर।
🌹
मन भी एक अजीब परिंदा है।
कब कहाँ उड़ जाता है।
पता ही नहीं चलता है।
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भटकता,ना जाने क्या ढूंढता है।
जितना भी मुट्ठी में कैद करो,
ये दूर-कहीं-दूर भाग जाता है।
🌹
शांत शिथिल निर्मल बस
एक शून्य में खो जाता है।
कभी तो खामोशी का
चादर ओढ़ सो जाता है।
🌹
कभी गुनगुनाता,
कभी फुसफुसाता,
मुझको मुझसे हीं
दूर ले जाता है।
🌹
क्या चाहता ?
क्या मांगता ?
ना इसे पता
ना मुझे पता।
🌹
मन में ख्यालों के
बुल बुले उठते हैं।
कुछ सुलझे,
कुछ अनसुलझे हैं।
🌹🌹🌹🌹—लक्षमी सिंह💓😊

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

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