मन खट्टा

राजेश

रचनाकार- राजेश"ललित" शर्मा

विधा- मुक्तक

"मन खट्टा"
—————–
मन खट्टा हो गया
चल यार
कैसी बात करता है
मन कभी मीठा हुआ
कभी सुना क्या?
नहीं न
यूँ ही जमी रहेगी दही
रिश्तों की
खटास रहेगी ही
चाहे जितना डालो चीनी
फिर मन खट्टा
हुआ तो हुआ
क्या करें?????
————————
राजेश"ललित"शर्मा

Sponsored
Views 10
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
राजेश
Posts 52
Total Views 513
मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और कच्ची उम्र की कविता निकली।वह सिलसिला आज तक अनवरत चल रहा है।कुछ समय के लिये थोड़ा धीमा हुआ पर रुका नहीं।अब सक्रिय हूँ ,नियमित रुप से लिख रहा हूँ।जब तक मन में भाव नहीं उमड़ते और मथे नहीं जाते तब तक मैं उन्हें शब्द नहीं दे पाता। लेखन :- राजेश"ललित"शर्मा रचनाधर्म:-पाँचजन्य में प्रकाशित "लाशों के ढेर पर"।"माटी की महक" काव्य संग्रह में प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia