मन और आत्मा

guru saxena

रचनाकार- guru saxena

विधा- घनाक्षरी

आत्मा ने कहा परमात्मा में ध्यान लगा
मनचाहे और थोड़ा सा रोमांस देख लूं।
आत्मा ने कहा सौ सौ बार देखा छोड़ इसे
मनचाहे और बस एक चांस देख लूं।
आत्मा ने कहा हरि कीर्तन कर नांच
मनचाहे कैबरे सरीखा डांस देख लूं।
भोगना चौरासी लाख तब ये मिलेगी देह
जो कुछ भी देखना है एडवांस देख लूं।

गुरू सक्सेना नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)

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