“””मनु””” के कड़वे सत्य वचन,,,,

मानक लाल*मनु*

रचनाकार- मानक लाल*मनु*

विधा- अन्य

"""मनु"""के सुप्रभात के कड़वे सत्य वचन,,,,

कुछ लोग बेवक़्त इतना कह जाते है,,,
की वक़्त आने पर उनके बोल बंद हो जाते है,,,

कुछ लोग मांगकर के अपना नुकशान करलेते है कि क्योकि देने बाले को ही फायदा पहुँचा जाते है,,,

कुछ लोग संसार की मिथक वस्तुओं के लिए जीवित इंसान को भूल जाते है,,,

जबकि दो लोग दुनिया में आने के लिए (माँ व दाई माँ)चार (भाई,भतीजा,बेटा,दोस्त,)लोग दुनिया से जाते वक्त चाहिए ही फिर क्यो भूल जाते है,,,
सब्जी मंडी है ये दुनिया और हम तुम पालक तुरिया रंग और कीमत सही रखो नही तो डला में ही सड़ जाना है,,,

मानक लाल मनु,,,
सरस्वती साहित्य परिषद,,,,

Sponsored
Views 29
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
मानक लाल*मनु*
Posts 52
Total Views 1.1k
सरस्वती साहित्य परिशद के सदस्य के रूप में रचना पाठ,,, स्थानीय समाचार पत्रों में रचना प्रकाशित,,, सभी विधाओं में रचनाकरण, मानक लाल मनु,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia