मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कविता

मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे
खाना नहीं पेट भर फिर भी बढ़ा रहे बच्चे

दिव्य चेत बिन नाच रहा नर, बनकर नंगा
बिना ज्ञान के बढ़े गरीबी ,बढ़ते दंगा
सँभल बुढापे, पलटवार करते हैं अब बच्चे
मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे

दारू पीकर शेषनाग बनती तरुणाई
गिर, नाली का पानी पी लेती जम्हाई
खास-खाँस लें श्वास रूप पर नाच रहे लुच्चे
मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे

बेटी शिक्षा की भूखी, निज घर में रोती
पाषाड़ों-सी बनी, कुपोषित, दुख को ढोती
हे ईश्वर हम शांतआज भी बन करके कच्चे
मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता

"जागा हिंदुस्तान चाहिए" कृति की रचना
पेज-65 से
07-05-2017

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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