मनहरण

सगीता शर्मा

रचनाकार- सगीता शर्मा

विधा- कविता

मनहरण.
💐💐💐💐💐
8887+4.
💐💐💐💐💐
देख सको तो देख लो
प्रेम इन से सीख लो
दिलो में अपने सदा
प्यार रखना जिन्दा.

मन की आँख खोल लो
दिल में जो है बोल दो
प्यार से लग जा गले
कहता है परिन्दा.

गुण सभी के देखना.
दिल में खुद झाँकना
गुणी तो तुम भी नही
न करो परनिन्दा.

भेद भाव मिटा नही
नही प्रेम मिला कही
इंसानियत फिर यू
होती है शर्मिन्दा
💐💐💐💐💐25/2/2017
संगीता शर्मा💐💐💐💐

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सगीता शर्मा
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परिचय . संगीता शर्मा. आगरा . रूचि. लेखन. लघु कथा ,कहानी,कविता,गीत,गजल,मुक्तक,छंद,.आदि. सम्मान . मुक्तर मणि,सतकवीर सम्मान , मानस मणि आदि. प्यार की तलाश कहानी पुरस्क्रति.धूप सी जिन्दगी कविता सम्मानित.. चाबी लधु कथा हिन्दी व पंजाबी में प्रकाशित . संगीता शर्मा.

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