मनहरण

सगीता शर्मा

रचनाकार- सगीता शर्मा

विधा- घनाक्षरी

मनहरण.
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प्यार हो सम्मान हो.
और दिलो में मान हो.
संस्कार दिल में रहे
रंग रूप साथ हो.

रूप रंग तब खिला.
आज पिया जब मिला.
दिल की ये चाहत है.
यू हाथो में हाथ हो.

प्यार हो इकरार हो.
न कभी तकरार हो.
मन से मन जो जुडे.
बिन बोले बात हो

संग जो सजन रहे.
न कोई शिकवे रहे.
प्यार की बस बात हो
न खतम रात हो.

संगीता शर्मा.
15/3/2017

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सगीता शर्मा
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परिचय . संगीता शर्मा. आगरा . रूचि. लेखन. लघु कथा ,कहानी,कविता,गीत,गजल,मुक्तक,छंद,.आदि. सम्मान . मुक्तर मणि,सतकवीर सम्मान , मानस मणि आदि. प्यार की तलाश कहानी पुरस्क्रति.धूप सी जिन्दगी कविता सम्मानित.. चाबी लधु कथा हिन्दी व पंजाबी में प्रकाशित . संगीता शर्मा.

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