” मदहोशी छाने लगी है ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

रचनाकार- भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

विधा- गीत

बासन्ती रंग में ,
रंग गये हैं !
हम बुत तो जैसे ,
थम गये हैं !
संग तेरा पा लिया –
पवन इतराने लगी है !!
यों खुशबुओं से ,
जादू किया !
अपने रंग में हमें ,
तर कर दिया !
डूबकर मस्तियों में –
जुल्फें बल खाने लगी हैं !!
कसमें ना टूटे ,
प्रतीक्षा अब !
इंद्रधनुष तन गया ,
धरती पे रब !
पैमाने छलके न ज्यादा –
घड़ियाँ समझाने लगी हैं !

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भगवती प्रसाद व्यास
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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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