*** मत पूछ ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- शेर

मत पूछ मुझे महोबत ने क्या क्या दिया

बहुत से जख्म दिए कुछ और बाकी है ।।
. 👍मधुप बैरागी

मत डूबो इतना कल्पनाओं में कवियों कि रवि बन जाओ

तपन दिल की है या अगन कोई और कि कवि बन जाओ

समझो जमाने को जो ताप सह पाया है सूरज का दूर से

चाँद रोशनी पा रहता दूर कहीँ एकांत दुखी ना बन जाओ

👍मधुप बैरागी

Sponsored
Views 13
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 383
Total Views 9.5k
मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia