***** मत पूछ सवाल ऐ जमाने *****

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गज़ल/गीतिका

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

वक्त आने पर बता देंगे,क्या हमारे दिल में है

देख बाहर की चकाचौंध,ना ये कयास लगा

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

वक्त गुजरा है जमाने तुझे समझने को बहुत

अब ना झुकेगा जमाने सज़दे में तेरे ये सर

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

मयस्सर ना मुझको हो चाहे अब तेरा ये दर

मैं झुका हूं बहुत तेरे सम्मान में हरक्षण हरदम

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

मुझको मिला क्या,क्या नहीं अब मुझे नही ये ग़म

तेरी चौखट से कई बार निकला हो बेदम

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

मैंने शिकवा-शिकायत नहीं की तुमसे है ये क्या कम

दौलतों के तराजू में तोले ग़म है ये क्या कम

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

आज क्यूं बोखलाहट है तेरे दौलते-समंदर

सागर से तेरे दिल में है क्यूं आज इतनी हलचल

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

बैचेन है आज क्यूं,तूं ओरों को यूं बेकरार कर

वो तेरे दिल का करार आज यूं ना बेकार कर

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

हो सके तो अपने को तूं इस ग़म-सागर से पार कर

मुझसे मिलना है तो आँखे मुझसे दो-चार कर

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

क्यूं घबराहट है मिलने में छिपके यूं वार ना कर

अब है आगाज़ हिम्मत है तो आर-पार कर

मत पूछ सवाल ऐ जमाने क्या हमारे दिल में है

वक्त आने पर बता देंगे,क्या हमारे दिल में है।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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