मत्तागयन्द/मालती छंद

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- मुक्तक

1
मौसम आज करे मदहोश बयार चली बहकी बहकी सी
घूँघट खोल रही कलिका लगती कितनी चहकी चहकी सी
फूल खिले उड़ती खुशबू लगती बगिया महकी महकी सी
लाल हुई गुलमोहर की हर डाल लगे दहकी दहकी सी
2

मात पिता गम दूर भगा कर दामन में खुशियाँ भरते हैं
संतन की उँगली पकड़े उनके सँग राह सभी चलते हैं
काम बड़े दिन रात करें न कभी लगता वह तो थकते हैं
क्षीण वही जब हो तब बोझ बने घर में सहमे रहते हैं
3
अम्बर आज अबीर गुलाल उड़े मन पागल सा इतराये
ओढ़ बसंत नई चुनरी इक दुल्हन सा लगता शरमाये
गान करें भँवरे मनभावन फागुन ये सबके मन भाये
और रँगीन फुहार भिगो तन याद पिया अब खूब दिलाये

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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