मटका : हमारी संस्कृति भी, हमारा स्वास्थ्य भी

राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'

रचनाकार- राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'

विधा- लेख

आज का समय तेजी से भागती दुनिया का है। प्रतियोगिताओं के जंजाल ने हमें खुद में जकड रखा है और इन सब के बीच हमारे मूल्य व् संस्कार कहीँ पीछे छूटते जा रहे हैं।

खैर । गर्मियाँ अपने चरम पर आ चुकी हैं और इसी के साथ फ्रिज में बोतल रखने का सिलसिला ,बाजार में कोल्डड्रिंक व् आइसक्रीम खाने का सिलसिला भी शुरू हो चूका है और कहीँ इक्कादुक्का जगहों पर मटके बेचने वाले और प्याऊ लगाने वाले भी देखने को मिल जाते हैं। अपनी निजी जिंदगी के बीच हम स्टार्ट-अप्स की बात करते हुए ,एम्प्लॉयमेंट क्रिएशन की चर्चा करते हुए हम ये भूल जाते हैं कि आज जिस तरह से हम घड़े का खुशबूदार पानी छोड़कर फ्रिज के पानी के पीछे बावले हुए जा रहे हैं उससे हम अपने स्वास्थ्य को नुकसान तो पहुंचा ही रहे हैं, साथ ही साथ न जाने कितने हजारों कुम्भकार भाइयो का रोजगार भी उनसे छीन रहे हैं।

मटके का पानी जिसे पीना हम अपनी शान-ओ-शौकत के विरुद्ध आज जो फायदे मुझे पता चले उसे सुन आप भी सोचने पर मजबूर हो जायेंगे की क्या क्या हम अब तक खो चुके हैं –
1) मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाए, तो उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं। इसलिए घड़े में रखा पानी हमें स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

2)नियमित रूप से घड़े का पानी पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। साथ ही यह भी पाया गया है कि घड़े में पानी स्‍टोर करने से शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर बढ़ जाता है।

3)घड़े का पानी पीने का एक और लाभ यह भी है कि इसमें मिट्टी में क्षारीय गुण विद्यमान होते है। क्षारीय पानी की अम्लता के साथ प्रभावित होकर, उचित पीएच संतुलन प्रदान करता है। इस पानी को पीने से एसिडिटी पर अंकुश लगाने और पेट के दर्द से राहत प्रदान पाने में मदद मिलती हैं।

4)मटके का पानी बहुत अधिक ठंडा ना होने से वात नहीं बढाता, इसका पानी संतुष्टि देता है। मटके को रंगने के लिए गेरू का इस्तेमाल होता है जो गर्मी में शीतलता प्रदान करता है। मटके के पानी से कब्ज ,गला ख़राब होना आदि रोग नहीं होते।

इसके साथ ही फ्रिज के ठन्डे पानी से होने वाले नुकसानों को जानकार तो हम सोचने पर ही विवश हो जाएंगे –
1) ठंडा पानी पीने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे पाचन की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और क्योंकि भोजन का पाचन ठीक से नहीं होता।

2) अध्ययनों से पता चला है कि ठंडा पानी वेगस तंत्रिका को उत्तेजित करता है। वेगस तंत्रिका 10 वीं कपाल तंत्रिका है तथा यह शरीर के स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो शरीर के अनैच्छिक कार्यों को नियंत्रित करती है। वेगस तंत्रिका हृदय की गति को कम करने में मध्यस्थता करती है तथा ठंडा पानी इस तंत्रिका को उत्तेजित करता है जिसके कारण हृदय की गति कम हो जाती है।

3)जिस तरह से फ्रिज में रखी मिठाई जम जाती है। वैसे ही ठंडा पानी शरीर में मल को जमा देता है जो अंत में पाइल्स या बड़ी आंत से सम्बन्धित रोगों का सबसे बड़ा कारण बनता है। इससे मल कठोर हो जाता है।

अब फैसला हम सब को करना है कि हमें अपने पूर्वजों के बताये तरीकों पर चल कर खुद को सुरक्षित रखना है या एडवरटाइजमेंट से प्रभावित हो खुद को समय से पहले ही मिटटी में मिला देना है।

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राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'
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न मंजिल पता है, न डगर हमें मालूम है, रुकना कहाँ है, मुझे नहीं मालूम है, धक्का दे रहा है ये जमाना मुझे, कहाँ धकेलना चाहता है ,ये मुझे नहीं मालूम है।

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