मगरमच्छ

Rajeev 'Prakhar'

रचनाकार- Rajeev 'Prakhar'

विधा- कविता

मोटे-ताजे-रसीले व्यंजनों के शौकीन,
एक मगरमच्छ का दिल,
एक नेताजी पर,
मचल गया था l
नेताजी का स्वास्थ्य,
उसे रास आ़या,
इसलिये वह उन्हें,
पूरा का पूरा,
निगल गया था l
परन्तु, निगलते ही,
उसका शरीर भीतर से,
बुरी तरह उबल गया l
नेताजी की नेतागिरी,
पचा न पाया,
इसलिये उन्हें,
जीवित ही,
वापस बाहर उगल दिया l

(सर्वाधिकार सुरक्षित)

– राजीव 'प्रखर'
मुरादाबाद (उ. प्र.)
मो. 8941912642

Views 46
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Rajeev 'Prakhar'
Posts 17
Total Views 752
I am Rajeev 'Prakhar' active in the field of Kavita.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia