मकर सक्रांति

Sumita R Mundhra

रचनाकार- Sumita R Mundhra

विधा- कविता

सौ.सुमिता राजकुमार मूंधड़ा

मकर संक्रांति
___________
समय – समय पर देते हैं ,
हमारे त्यौहार हमें संदेश ।
प्यार से रहना सीखो बंधु ,
छोड़ कर सारे क्लेश ।

इन रीति-रिवाजों के बहाने ,
टूटे रिश्ते भी जुड़ जाते हैं ।
गरिमा बढ़ जाती है धर्म की,
जब मिलके संक्रांति मनाते हैं।

– सौ. सुमिता राजकुमार मूंधड़ा
– Sumita R Mundhra
Sumitamundhra@gmail.com

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Sumita R Mundhra
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मैं लेखिका या कवियत्री नहीं हूँ । बचपन से ही शौक से लिखती हूँ । लंबे अंतराल के बाद हमसफ़र राज और पुत्र रिषभ के प्रेरित करने पर मेरी कलम फिर से शब्दों को पिरोने लगी है । प्रोत्साहन मिलता है तो ओर अच्छा लिखने की कोशिश करती हूँ । सामाजिक पत्रिकाओं में लेख और कवितायें प्रकाशित होते हैं। धन्यवाद - सौ. सुमिता राजकुमार मूंधड़ा । sumitamundhra@gmail.com FB group :- मेरी कलम से - Sumita R Mundhra

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