भ्रष्ट कहौ जौ उनका तौ बौराय जात हैं.

प्रदीप तिवारी 'धवल'

रचनाकार- प्रदीप तिवारी 'धवल'

विधा- गीत

भ्रष्ट कहौ जौ उनका तौ बौराय जात हैं.
थरिया कै अस जूँठन वै कर्राय जात हैं.

जब से भएँ सरकारी अफसर मिटा दरिद्दर सारा.
गाड़ी बंगला नौकर चाकर, खाय फिरी कै चारा.
वेतन से चौगुना वै खर्चा, उठाये जात हैं.

सुनौ कहानी वै मनई कै जेह्का कहत हौ नेता.
जेह्के आगे पानी मांगे बड़े बड़े अभिनेता.
दीमक बनिके सगरौ देशवा, खाये जात हैं.

शिक्षा कै तौ हाल न पूछौ दुरदिन किहे सवारी.
शिक्षक मिडडेमील खवावै पढ़बलिखब भा भारी.
सब मिलिके बेरोजगारी, बढ़ाये जात हैं.

दवा कम्पनिन के चक्कर माँ फंसे डाक्टर सारे
देश विदेश सैर को जाएँ प्रिस्क्रिप्सन के सहारे.
डाक्टरी सेवा मा कालिख, लगाये जात हैं.

न्यूज़ बेच के बना मीडिया सबसे बड़ा धुरंधर.
कलके छोट रिपोर्टर भैया आज महल के अन्दर.
राजनीति मा भोंपू बनके, चिल्लाये जात हैं.

धरम करम कै खूब दुकनियाँ भीड़ बड़ी है भारी.
नंबर दुई कै पैसा बढगा घूस लेंय त्रिपुरारी.
बाबा बनके जनता का, सताये जात हैं.

Pradeep Tiwari

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प्रदीप तिवारी 'धवल'
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मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी देख और खरीद सकते हैं. हिंदी और अवधी में रचनाएँ करता हूँ. उप संपादक -अवध ज्योति. वर्तमान में एयर कस्टम्स ऑफिसर के पद पर लखनऊ एअरपोर्ट पर तैनात हूँ. संपर्क -9415381880

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