भोर से पहले—-

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

रचनाकार- मुकेश कुमार बड़गैयाँ

विधा- कविता

समय चूक जाये
पर वो नहीं रुकती
उजाले से पहले
भोर से पहले
आ जाती है
वो नन्ही सी चिड़िया
मधुर गीत गाती
निमिष भर देर नहीं होती
जब तक जीवन है
वो चहचहायेगी
गीत गायेगी
हम सबको मीठे संगीत से जगायेगी।
हम आज की बात कल भूल जाते हैं
हर पल चूक जाते हैं
पहरेदारी में भी पाबंद नहीं
चिड़िया तो बिना कहे
समय से पहले
रोज आ जाती है!
हम कभी
चिड़िया जैसे नहीं बन सकते।
चिड़िया होते तो शायद!
सोचते ।

Views 39
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
मुकेश कुमार बड़गैयाँ
Posts 14
Total Views 507
I am mukesh kumarBadgaiyan ;a teacher of language . I consider myself a student & would remain a student throughout my life.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia