भैया आतीं याद पुरानी वो बातें

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गीत

भैया आती याद पुरानी वो बातें
बचपन में करते थे रोज खुराफातें

तुम दुश्मन भी सबसे बड़े हमारे थे
मगर जान से ज्यादा हमको प्यारे थे
झगड़े अपने होते वही पुराने थे
भैया बचपन के दिन बहुत सुहाने थे
अब तो हो भी पाती नहीं मुलाकातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

राखी पर क्या धूम धड़ाका मचता था
नेग मुझे कुछ देना तुम्हें अखरता था
मैं भी लड़ लड़ कर पैसे ले लेती थी
टॉफी लेकिन लाकर तुमको देती थी
मिलती नहीं अब तुमसे वैसी सौगातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

नई नई कागज़ की नाव बनाते थे
भीग भीग कर आँगन में तैराते थे
मम्मी के कदमों की आहट पाते थे
झट दरवाजे के पीछे छुप जाते थे
ढूँढे अब भी आँखें वो ही बरसातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

खुद तो मुझ पर कितना रोब जमाते थे
मेरी खातिर पर सबसे लड़ जाते थे
देर रात तक हम दोनों ही पढ़ते थे
भूख लगे तो पाक कला भी पढ़ते थे
जाग जाग कर काटी हैं कितनी रातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद
06-08-2018

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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