भेड़ियों के सम्मुख टिका दिया माथ

डॉ.मनोज रस्तोगी

रचनाकार- डॉ.मनोज रस्तोगी

विधा- गीत

भेड़ियों के सम्मुख टिका दिया माथ

रेल की पटरियों सा
हो गया जीवन
कुछ पाने के लिए
हम भटकते रहे
अर्थ लाभ के लिए
बर्फ से गलते रहे
सुख की कामना में
जर्जर हो गया तन
स्वाभिमान भी रख
गिरवीं नागोँ के हाथ
भेड़ियों के सम्मुख
टिका दिया माथ 
इस तरह होता रहा
अपना रोज चीरहरन
रेल की पटरियों सा
हो गया जीवन

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डॉ.मनोज रस्तोगी
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हिंदी साहित्य में मुरादाबाद के साहित्यकारों का योगदान पर शोध कार्य, मुरादाबाद की साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक,धार्मिक विरासत पर लेखन, काव्य,लघुकथा, रिपोतार्ज, संस्मरण विधाओं में लेखन, वर्तमान में दैनिक जागरण में उपसंपादक पद पर कार्यरत। सम्पर्क: डॉ. मनोज रस्तोगी 8, जीलाल स्ट्रीट मुरादाबाद 244001 उत्तर प्रदेश,भारत मोबाइल फोन नंबर 9456687822

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