भू-जल संग्रह दोहावली

AWADHESH NEMA

रचनाकार- AWADHESH NEMA

विधा- दोहे

धरती माँ की कोख में, जल के हैं भंडार ।
बूंद-बूंद को तड़प रहे, फिर भी हम लाचार ।।

दोहन करने के लिये, लगा दिया सब ज्ञान ।
पुनर्भरण से हट गया, हम लोगों का ध्यान ।।

गहरे से गहरे किये, हमने अपने कूप ।
रही कसर पूरी करी, लगा लगा नलकूप ।।

जल तो जीवन के लिये, होता है अनमोल ।
पर वर्षा के रूप में, मिलता है बेमोल ।।

अगर संजोते हम इसे, देकर पूरा ध्यान ।
सूखा बाढ़ न झेलते, रहता सुखी जहान ।।

आओ मिल-जुल रोक लें, हम वर्षा की धार ।
कूप और नलकूप फिर, कभी न हो बेकार ।।

बूंद-बूंद जल रोकिये, भरिये जल भंडार ।
पुनर्भरण से कीजिए, अब अपना उद्धार ।।

मेहनत से बढ़ जायेगा, भू-जल का भंडार ।
मानो नेक सलाह यह, कहे अवधेश कुमार ।।

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AWADHESH NEMA
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मध्यप्रदेश शासन कृषि विभाग में उप संचालक कृषि, आई आई टी खरगपुर से वर्ष 1984 में भूमि एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी से एम. टेक.। अध्ययन यात्रा हेतु आस्ट्रेलिया भ्रमण । आई टी प्रयोग तथा उत्कृष्ट लोकसेवा प्रबंधन हेतु मुख्यमंत्री पुरूस्कार तथा राष्ट्रीय गौरव अवार्ड । जन उपयोगी ज्ञान का दोहा चौपाइयों के रूप में प्रस्तुतीकरण www.awadheshnema.blogspot.in

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