भूल बैठा हूँ तभी से जानेमन ये मयकदा

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

आज की हासिल
ग़ज़ल
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आ गया है दर्द लेकर फिर फिर दुखों का काफिला
खो गया है भीड़ में ये दिल हमारा ग़मज़दा
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प्यार तो मिलता नहीं है अब दिलों में देखिए
आदमी बुग़्जो हसद में आज कल है जी रहा
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जब से देखी है नशीली ये निगाहें आपकी
भूल बैठा हूँ तभी से जानेमन ये मयक़दा
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सब्ज़ होगा किस तरह से बाग अपने मुल्क़ का
चार सूं चलने लगी है जब तनफ़्फ़ुर की हवा
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इम्तिहाने इश्क़ है या दौर कोई मौत का
आजमाता ही रहा है वो सितमग़र बारहा
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दर्दे-उल्फ़त दर्दे-हिज्रां जिन्दगी में गर नहीं
आए गा फिर किस तरह से जीने का इतना मज़ा
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गर नहीं मिट पाएं गी ये नफ़रतें "प्रीतम" अभी
सोच लो आ जाय गा फिर एक दिन तो ज़लज़ला
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प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
18/09/2017
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2122 2122 2122 212
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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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