– ## – भूख – ## –

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

भूख है वह बीमारी जिससे कोई न बच पाया।
जन्म से लेकर अंत सांस तक अपना पीछा न छुड़ा पाया।।

भूख वो बुरी है लत जिसने हर प्राणी को भरमाया।
इन्सान हो जीव जंतु सब पर है इसका साया।।

भूख है वो लाचारी जिसने गरीब को इस कदर हराया।
एक मजबूर मां ने कुत्ते से रोटी का टुकड़ा छीन अपने बच्चे को खिलाया।।

भूख इंसान से सब कुछ करवाने में सक्षम है।
अमीर हो या गरीब उसमें सबको झुकाने का दम है।।

इसीलिए कहा गया है कि पापी पेट का सवाल है।
भूख ही तो यारों सारे जी का जंजाल है।।

—–रंजना माथुर दिनांक 19/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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