भारत ही हर ओर है

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- कविता

शोर है हां शोर है हर जगह यह शोर है
हर दिशा हर जगह हर मुल्क में हर ओर है

सिर्फ भारत सिर्फ भारत भारत का ही जोर है

बाग ऐ बहिश्त धरा जहाँ की
आफरीन फिजा यहां की
सारी निकाहत इस जहां की, चड़ रहा वो भोर है

शोर है,,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

हर ओर जहाँ फैला ये चमन
धरती से लेकर गगन
शांति का प्रतीक हवाओं में बिखरा अमन, मुहब्बतें हर ओर है

शोर है,,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

राधा मीरा गीत गवैया
हर चौराहे राम रमैया
मुरलीमनोहर क्रष्ण कन्हैया दाता माखन चोर है

शोर है,,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

कुदरत की सारी फिजायें कश्मीर में चूर है
अम्रितसर का स्वर्ण मंदिर कोई नूर है
मुहब्बत की दास्तां को ताजमहल मशहूर है यहां अलौकिकता घन्घोर है

शोर है,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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