भारत भू को बाँट रहे

सतीश चोपड़ा

रचनाकार- सतीश चोपड़ा

विधा- कविता

कर गुणगान इतिहास का ये जो भारत भू को बाँट रहे
निवाला एक देकर हमे ये जो रस मलाई को चाट रहे

पथ भटके हो करतब उनके तुम नहीं समझ पाओगे
खो चुके आपस का भाई चारा कैसे संभल पाओगे
लड़ाकर तुम्हे एक दूसरे से देखो ले अब वो ठाठ रहे

तू मुसलमान मैं हिन्दू तू जाट मैं चमार बता फर्क क्या है
तू पढता नमाज मैं करता आरती जरा बता हर्ज क्या है
लाल करवाकर आँख हमारी दुश्मन नंगे वो नाच रहे

हम सबका है ये देश बीज प्यार के पुरखों ने बोए है
आज नहीं तो कल हम सबने पिता और बेटे खोए है
फिर होते कौन हैं प्रमाणपत्र देशभक्ति के जो बाँट रहे

कर गुणगान इतिहास का ये जो भारत भू को बाँट रहे
निवाला एक देकर हमे ये जो रस मलाई को चाट रहे

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सतीश चोपड़ा
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नाम: सतीश चोपड़ा निवास स्थान: रोहतक, हरियाणा। कार्यक्षेत्र: हरियाणा शिक्षा विभाग में सामाजिक अध्ययन अध्यापक के पद पर कार्यरत्त। अध्यापन का 18 वर्ष का अनुभव। शैक्षणिक योग्यता: प्रभाकर, B. A. M.A. इतिहास, MBA, B. Ed साहित्य के प्रति विद्यालय समय से ही रुझान रहा है। विभिन्न विषयों पर लेख, कविता, गजल व शेर लिखता हूँ। कलम के माध्यम से दिल की आवाज दिलों तक पहुँचा सकूँ इतनी सी चाहत है।

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