भाभी बोलीं बाय-बाय…: हास्य घनाक्षरी

Ambarish Srivastava

रचनाकार- Ambarish Srivastava

विधा- कविता

रोज रोज आते जाते, भाभीजी को छेड़ें भैया,
बाय-बाय चार बच्चों, वाली अम्मा गोरी हो .
भैया रोज लेते मौज, भाभी होतीं परेशान.
अच्छी नहीं खींचतान, ना ही जोराजोरी हो .
समझाया सहेली ने भाभीजी को इकरोज,
खुलेआम दे दो डोज, दुखे पोरी-पोरी हो.
ससुरे से चले भाय, भाभी बोलीं बाय-बाय,
चार में से दो बच्चों के, बापू शुभ होरी हो..

–इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

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Ambarish Srivastava
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30 जून 1965 में उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के “सरैया-कायस्थान” गाँव में जन्मे कवि अम्बरीष श्रीवास्तव एक प्रख्यात वास्तुशिल्प अभियंता एवं मूल्यांकक होने के साथ राष्ट्रवादी विचारधारा के कवि हैं। प्राप्त सम्मान व अवार्ड:- राष्ट्रीय अवार्ड "इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड 2007", "अभियंत्रणश्री" सम्मान 2007 तथा "सरस्वती रत्न" सम्मान 2009 आदि | email:ambarishji@gmail.com

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