भाई जी

साहेबलाल 'सरल'

रचनाकार- साहेबलाल 'सरल'

विधा- गज़ल/गीतिका

भाई जी
2222 2222 222

मरते वो इंसान जहां में भाई जी।।
रखते ना पहचान जहां में भाई जी।।

तोड़ेंगे जंजीर जहर ही जाति' है
अपना है अरमान जहां में भाई जी।।

भारतमाँ सबको जां से भी प्यारी हो,
कर देना बलिदान जहां में भाई जी ।।

विश्व पटल पर अब ये परचम बटवा दो
इस माटी में जान जहां में भाई जी।।

समता की बौछार उड़ा दो दुनिया में,
सूर, 'सरल', रसखान जहां में भाई जी।।

-साहेबलाल 'सरल'

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साहेबलाल 'सरल'
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संक्षेप परिचय *अभिव्यक्ति भावों की" कविता संग्रह का प्रकाशन सन 2011 *'रानी अवंती बाई की वीरगाथा' की आडियो का विभिन्न मंचो में प्रयोग। *'शौचालय बनवा लो' गीत की ऑडियो रिकार्डिंग बेहद चर्चित। *अनेको रचनाएं देश की नामचीन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। *छंद विधान के कवि के रूप में देश के विभिन्न अखिल भारतीय मंचो पर स्थान। *संपर्क नम्बर-8989800500, 7000432167

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