तुम्हें खुशियों भरा आँगन,मुबारक हो मुबारक हो

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

तुम्हें खुशियों भरा आँगन,मुबारक हो मुबारक हो
बरसता नेह का सावन मुबारक हो मुबारक हो

कहीं ढोलक की हैं थापें, कहीं घुघरू की है रुनझुन
कहे ये झूम सबका मन ,मुबारक हो मुबारक हो

शरारत है हवाओं में, घुली मस्ती फिजाओं में
हुआ रिश्तों से घर रोशन,मुबारक हो मुबारक हो

सजा दूल्हे के सर सेहरा,सजी दुल्हन की भी डोली
घड़ी आई ये मनभावन, मुबारक हो मुबारक हो

यही है आरजू मेरी, यही है अब दुआ मेरी
महकता ही रहे उपवन, मुबारक हो मुबारक हो

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
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