भजन :- * श्याम मोरे अब दे दो दर्शन *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- अन्य

प्रारम्भिक बोल
श्याम मोरे अब दे दो दर्शन
जीवन -सन्ध्या आन खड़ी
मीच मुझे ताकन लागी
दाव पड़े खावन लागी।।
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आलाप
श्याम मोरे श्याम
श्याम मोरे श्याम
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** ॐ **
दीन-दुखी अब तेरे द्वारे
आन मिलो अब मोहन प्यारे
छिन-छिन दूभर जीवन लागे
अब भवसागर से तारो प्यारे
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पीर बनी है गिरिवर भारी
हे गिरधारी उबारो इससे
जीवन-बंशी सुर-हीन बनी है
धारो कर में हे मुरलीधारी
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गो -धन अब ना सम्भरे साईं
इत-उत जात, ना थिर हो पाई
हे गोपाल दीनदयाल
बंशीधर हे ब्रजबिहारी
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लूट मची है अब गोकुल में
तन-गोकुल को आन बचा लो
हे कंसारी हे कृष्णमुरारी
दुखभंजक हे नन्ददुलारे
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भवसिंधु से तारो अब तो
नैन हमारे दूखन लागे
कब आओगे कृष्ण-मुरारे
नैन हमारे हारन लागे
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दीन-दुखी अब तेरे द्वारे
आन मिलो अब मोहन प्यारे ।।
********* 👍मधुप बैरागी
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी
हे नाथ नारायण वासुदेवा

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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