भगवान को किसने बनाया ?

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

भगवान को किसने बनाया ?
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भगवान को किसने बनाया?
है ना एक अजीब सा सवाल
हम अक़्सर ये सोचते हैं कि
सभी को भगवान ने बनाया
फिर भगवान ने भेदभाव
कुछ अटपटा सा लगता है
फिर इतने सारे भगवान फिर
दिमाग़ फिरने लगता है फिर
इंसान इंसान को फिराने फिर
ये फेर ऐसा फिरा कि फिर फिर
लौट के इंसान आने लगा जगत में
बड़ा अज़ीब चक्र चलाया उस अज्ञात
भगवान ने इंसान को इतना बेईमान
बनाया कि इंसान को इंसान
कभी नहीं समझ पाया
ये किसी भगवान का कारनामा
नहीं था महज़ इंसान का खेल था
जो भगवान कभी था ही नहीं
उसे तो इंसान ने हीं बनाया था
अपने उपयोग के लिए खिलौना
जिसे लॉकअप में बन्द रखता है
कहीं भाग न जाये बन्धुआ मजदूर
फिर हमारी आमदनी का क्या होगा
फिर हमारी बेगार कौन करेगा
कौन हमारा पेट भरेगा बेचारा
भगवान इनका पेट भरते भरते
थक गया है बड़ा लाचार है
उसे छुड़ाने की आवश्यकता है
जिसको इंसान ने बनाया ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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