***बैसाखी पर्व***

Dr Meenaxi Kaushik

रचनाकार- Dr Meenaxi Kaushik

विधा- कविता

रंग रंगीला बैसाखी पर्व है आया
खुशियों ने है रंग जमाया |

चारों तरफ है छाई बहार
दिल में जागी उमंगे हजार|

साकार हुए हैं सबके सपने
मिल कर बैठे सारे अपने |

धरती का मुग्ध हुआ हर कोना
खेतों मे बिखरा है सोना |

देख कर जिसको हर पल
महक रहा किसान का मन आँगन |

तासे ढोलक और बाजे बजे है
देखो सब मस्त मग्न सजे हैं |

चिडियों से वो बाज लडाए
तब गुरू गोबिन्द वो नाम धराए |

देकर प्यारा पंथ खालसा
बन गए वो सबके दिलों के बादशाह |

गंगा मैय्या तब धरा पर आई
भक्ति की है की धारा बहाई

आओ "मीनाक्षी" सब मिल नाचे गाएं
पावन बैसाखी का हम पर्व मनाएं |
डॉ मीनाक्षी कौशिक रोहतक

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Dr Meenaxi Kaushik
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मांगा नही खुदा से ज्यादा बस इतना चाहती हूँ, करके कर्म कुछ अच्छे सबके दिलों मे रहना चाहती हूँl ईश वन्दना जन सेवा कर जीवन बिताना चाहती हूँ, हर पल हर चेहरे पर मुस्कुराहट लाना चाहती हूँ ||

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