बेबस दिवाने

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- कविता

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मुहब्बत ही तो जालिम है कहे किस से बता यारा
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हमारे इश्क का दुश्मन बना बैठा है जग सारा
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तुम्हारी याद में दीपक जलाये गुनगुनाते हम
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जमाना कह रहा है कि कोई शायर है बेचारा
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नफरत के जमाने में दिवाने कम ही मिलते है
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किसी संग नाम करने के फसाने कम ही मिलते है
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यहां गर हो सके तुमसे किसी का साथ ले लेना
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बड़ी नाराज दुनिया है अनजाने गम ही मिलते है
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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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