*बेदाग बादशाह

Dinesh Sharma

रचनाकार- Dinesh Sharma

विधा- कविता

जब देखता हूँ खिलते कमल को
भोर में,
अंधेर घोर में,
आँखों में उतर जाती है
पवित्रता की किरणें,
कीचड़ में खिले कमल की
पवित्रता देखकर,
दर्शनीय है,वंदनीय है
नमन कमल तुझ को,
प्रेरणा है तू गजब सी
आश्चर्य सी
साहस सी
आँखों में विजयी चमक सी,
कि…गंदी कीचड़ में भी है तू
उज्जवल खिला खिला
बेदाग बादशाह,
दागदारो से भरी कलंकित दुनियां में
एक मिसाल है तू,
दृढ़ संकल्प शक्ति की,
उज्जवल खिला खिला
बेदाग बादशाह।।

^^^^^^^दिनेश शर्मा © ^^^^^^^

Views 84
Sponsored
Author
Dinesh Sharma
Posts 44
Total Views 2k
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia