बेटी

ashok dard

रचनाकार- ashok dard

विधा- कविता

बेटी
धरती का श्रृंगार है बेटी |
कुदरत का उपहार है बेटी ||
रंग-बिरंगे मौसम बेशक |
जैसे ऋतू बहार है बेटी ||
कहीं शारदा कहीं रणचंडी |
चिड़ियों की उदार है बेटी ||
दो कुलों की शान इसी से |
प्रेम का इक संसार है बेटी ||
इस बिन सृजन न हो पायेगा |
धरती का विस्तार है बेटी ||
बेटी बिन जग बेदम-नीरस |
जग में सरस फुहार है बेटी ||
मधुर-मधुर एहसास है बेटी |
पूर्णता-परिवार है बेटी ||
धरती का स्पन्दन है यह |
ईश-रूप साकार है बेटी ||
बेटे का मोह त्यागो प्यारे |
नूतन-सृजन-नुहार है बेटी ||
कुल की शान बढ़ाये बेटी |
मत समझो कि बहार है बेटी ||
दिल की बातें दर्द सुनाये |
अपने तो सरकार है बेटी ||
अशोक दर्द
प्रवास कुटीर ,गाँव व डाकघर बनीखेत
तह.डलहौजी जिला चंबा,हिमाचल प्रदेश 176303

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ashok dard
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अशोक दर्द लेखन-साहित्य की विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन व प्रकाशन सम्मान- विभिन्न सामजिक व साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित वर्तमान पता-प्रवास कुटीर बनीखेत तह. डलहौज़ी जि. चम्बा (हि.प्र) मोबाइल -9418248262 ईमेल-ashokdard23@gmail.com

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