बेटी

अनिल कुमार मिश्र

रचनाकार- अनिल कुमार मिश्र

विधा- कविता

बेटी है आधार जगत का
बेटी से है सार जगत का
बेटी देवी,बेटी सीता
बेटी बाइबल,कुरान और गीता।

बेटी में संसार छिपा है
जग का सारा सार छिपा है
बेटी के छुन-छुन पाँवों में
जीवन का सब अनुराग छिपा है।

बेटी सूरज बेटी चंदा
बिन बेटी जीवन है अंधा
बेटी प्रेम का दरिया छल-छल
मन उसका है प्रतिपल निर्मल।

देश है बेटी,राष्ट्र है बेटी
जन,गण,मन का मान है बेटी
संविधान भारत की बेटी
नवयुग का निर्माण है बेटी।
~~~अनिल कुमार मिश्र
'आञ्जनेय'
गाँधी नगर पूरब
हज़ारीबाग़,झारखण्ड

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 58
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
अनिल कुमार मिश्र
Posts 16
Total Views 171
अनिल कुमार मिश्र विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित काव्य संकलन'अब दिल्ली में डर लगता है'(अमेज़न,फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध) अशोक अंचल स्मृति सम्मान 2010 लगभग 20 वर्षों से शिक्षण एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन सम्प्रति प्राचार्य,सी बी एस ई स्कूल निरंतर मुक्त लेखन आपके स्नेह का पात्र संपर्क-9576729809 itsanil76@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia