बेटी….

डॉ. अनिता जैन

रचनाकार- डॉ. अनिता जैन "विपुला"

विधा- कविता

कन्या को जन्म दूँगी ….
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

हाँ मैं कन्या को जन्म दूँगी
एक जीवन को खिलने दूँगी ….

कौन होते हो तुम निर्दयी
जो मेरी कोख का फैसला करोगे
बेटों की चाह ने अँधा किया
मैं तो मेरी नन्ही जान को पलने दूँगी …

जाने क्या दे दिया ऐसा बेटों ने
जो बेटी हो जायेगी तो छिन जायेगा
बेवज़ह बेटों के गुमान में फूले न समाते
'माँ बनूँगी मैं' कातिलों की न दाल गलने दूँगी …

स्त्री होने पे घिन तो तब होती है
जब एक स्त्री ही जन्मपूर्व ही मृत्यु देना चाहे
ऐसी निष्ठुर हृदया को पाषाण ही बना देते
हे प्रभु ! है इतनी शक्ति किसी की न चलने दूँगी ….

कौनसा वो वाचाल शास्त्र है
जिसने पुरुषों को शिरोधार्य कर
प्रकृति के सहज विकास को चुनौती दी
मेरी ममता को मैं न कभी छलने दूँगी …..

हाँ … मैं कन्या को जन्म दूँगी , दूँगी , दूँगी ….
…..
@डॉ. अनिता जैन " विपुला "

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 45
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
डॉ. अनिता जैन
Posts 15
Total Views 128
Lecturer at college . Ph. D., NET, M. Phil. M. A. (Sanskrit , Hindi lit.) अंतर्मन के उद्गारों को काव्य रूप में साझा करना ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia