बेटी

Prashant Sharma

रचनाकार- Prashant Sharma

विधा- कविता

बेटा होता घर का लाडला
तो बेटी लाडली होती है।
बेटा मानो फूल है घर का
तो खुशबू बेटी होती है।

उछल कूद गर बेटा करता
वह चिड़िया सी चीं चीं करती है
घर बाहर वह शोर मचाती
सबके मन को हरती है।

बेटा गर कुल दीपक होता
तो बेटी ज्योति होती है।
ज्योति गऱ कहीं साथ छोड़ दे
तो दीपक बाती काली होती है।

माता-पिता पर संकट छाए
एक मुस्कान से खुश कर देती है।
और भाई पर विपदा आ जाए
बड़े प्यार से वो हर लेती है।

बेटा एक कुल रीत निभाये
तो बेटी दो कुल ढोती है।
इतने पर भी ताना खाए
और मन ही मन वह रोती है।

प्रशांत शर्मा "सरल"
नरसिंहपुर

Views 239
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Prashant Sharma
Posts 28
Total Views 1.1k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia