बेटी

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डॉ सुलक्षणा अहलावत

रचनाकार- डॉ सुलक्षणा अहलावत

विधा- कविता

जिस घर के आँगन में बेटी है वहाँ तुलसी की जरूरत नहीं,
देखो बेटी की सूरत से जुदा यहाँ किसी देवी की सूरत नहीं।

खुशियाँ पता पूछती हैं उस घर का जहाँ बेटियाँ रहती हैं,
बेटियों वाले घर से वो जन्नत भी ज्यादा खूबसूरत नहीं।

रिश्तों की नजाकत बेटियों से बेहतर कोई नहीं समझता,
आज की बेटी, कल की माँ जैसी जगत में कोई मूरत नहीं।

दौलत बाँटते हैं बेटे, दुःख को खुशियों में बदलती है बेटियाँ,
बेटी के हाथों से कार्य की शुरुआत से बढ़कर शुभ मुहूर्त नहीं।

बहुत खुशकिस्मत है "सुलक्षणा" जो एक बेटी की माँ बनी,
जो करती है बेटी से नफरत, मेरी नजर में वो औरत नहीं।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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डॉ सुलक्षणा अहलावत
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लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ सरस्वती की दयादृष्टि से लेखन में गहन रूचि है।

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