बेटी

Ramesh chandra Sharma

रचनाकार- Ramesh chandra Sharma

विधा- गज़ल/गीतिका

-: बेटी :-
मेरे आंगन में आकर जब भी चिड़िया चहचहाती है,
मैं रो लेता हूँ मन में, मुझको बेटी याद आती है।

कभी इस शाख पर डेरा कभी उस शाख पर डेरा,
किसी भी शाख पर बैठे सदा ये गुनगुनाती है।

सफ़र की हो थकन या कोई दफ़्तर की परेशानी,
मैं सब-कुछ भूल जाता हूँ, वो जब भी मुस्कुराती है।

टकपते हैँ जब उसकी सीप जैसी आँख़ से मोती
विदा होते समय बेटी मुझे अक्सर रुलाती है।

अगर बेटी हो घर में रोज़ ही त्योहार है समझो,
हमेशा दो घरों के बीच में वह पुल बनाती है।

यही है “आरसी” दौलत, यही है इक अमानत भी,
बुज़ुर्गों की दुआ बनकर ही बेटी घर में आती है।

-आर० सी० शर्मा “आरसी”

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Ramesh chandra Sharma
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गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी को तो पानी लिख ग़ज़ल संग्रह आकाशवाणी कोटा से काव्य पाठ कई साहित्य सम्मान एवं पुरुस्कारों से सम्मानित

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