बेटी है अनमोल इसकी पूजा करो

Vivek Guleria

रचनाकार- Vivek Guleria

विधा- कविता

…बेटी है अनमोल, इसकी पूजा करो…

नन्ही बेटी है,रोती है हंसती है।
इसके ही रंगों से,ये दुनिया सजती है।
इसकी हर नादानी पे,प्यार बहुत ही आता है।
देखूं रोते हुए जो इसे, दिल मेरा भर आता है।
इसके सिवा न अरमान, कोई दूजा करो।
बेटी है अनमोल, इसकी पूजा करो।।1।।

बेटी से संसार है,बेटी से संस्कार है।
जिस आन्गन में न महके ये कली, वो सूना है बेकार है।
नन्हे-कोमल हाथों से, छूती है जब गालों को।
मिट जाते हैं दर्द इक पल में सारे,सहलाती है जब बालों को।
इसके सिवा न अरमान, कोई दूजा करो।
बेटी है अनमोल, इसकी पूजा करो।।2।।

न होगी गर ये धरती पर,कोई दूल्हा न बन पाएगा।
नन्हे-नाजुक हाथों से,राखी कौन पहनाएगा।
रिश्ते जन्मे हैं सब इससे, ये रिश्तों का संसार है।
'मतलबी' सी इस दुनिया में, 'निःस्वार्थ ' माँ का प्यार है।
इसके सिवा न अरमान, कोई दूजा करो।
बेटी है अनमोल, इसकी पूजा करो।।3।।

मासूमियत को न तुम, ऐसे कत्ल करो।
जल्लाद न बनो, कुछ तो अक्ल करो।
ये सृष्टि की जननी है, ये ममता का सागर है।
निष्ठुर बंजर भूमि पे, जो बरसे वो ये बादल है।
इसके सिवा न अरमान, कोई दूजा करो।
बेटी है अनमोल, इसकी पूजा करो।।4।।

अबला नहीं है ये, ये आज की सबला नारी है।
इसके जज्बे के आगे, सारी दुनिया हारी है।
हो युद्ध का मैदान या, हो ऐवरैस्ट सा ऊंचा शिखर।
हर जगह निशां है इसके, तुम देख लो चाहे जिधर।
इसके सिवा न अरमान, कोई दूजा करो।
बेटी है अनमोल, इसकी पूजा करो।।5।।

जय माँ दुर्गा
Written by me:-
Vivek Guleria
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