बेटी भी तू जननी भी तू

श्यामू सिंह

रचनाकार- श्यामू सिंह

विधा- कविता

बेटी भी तू जननी हुई तू ,
ममता का समंदर तू।

तु ही दुर्गा तू ही काली,
खुशियों का बवंडर तू।

तुझसे ही है सारी दुनिया,
इस बगिया की माली तू।

सूर्य सा है तेज तेरा,
चाँद की शीतल लाली तू।

हँसी तेरी सरगम जैसी,
चंडी तू दयालु तू।

सरस्वती सी सूरत तेरी
धन,मन,अर्पण,जीवन तू।

बेटी भी तू जननी हुई तू ,
ममता का समंदर तू।।

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श्यामू सिंह
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मैं साहित्य प्रेमी व्यक्ति हूँ, न तो मैं दक्ष कवि हूँ, न ही लेखक बस कुछ खुबसूरत पंक्तियों को खूबसूरती से एक धागे में पिरोने का प्रयास करता हूँ,और बस एक हार तैयार हो जाती है और उसकी खूबसूरती तो बस आप बता सकते हैं।

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