बेटी घर का है उजियारा

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

रचनाकार- Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

विधा- गीत

चलो साथियो, मिल के घर-घर, इक अभियान चलाएँँ।
बेटी घर का है उजियारा, यह संज्ञान करायें।।

माँँ की गोद हरी हो जब बेटी से, सब कहते हैं।
लक्ष्‍मी सुख-समृद्धि लेकर आई है, सब कहते हैं।
कुल कुटुम्‍ब का मान बढ़ाती, इसका मान बढ़ाएँँ।।
बेटी घर का है उजियारा……'

भेद भाव ना कभी करें, बेटी-बेटे होने पर।
सभी बनेंगे घर बगिया के, फूूल बड़े होने पर।
मात-पिता ही भाग्‍य बनाते,यह भी ध्‍यान कराएँँ।।
बेटी घर का है उजियारा……'

बेटी से ही घर के हर, रिश्‍ते की एक अहमियत।
बेटी से ही बहिन, बहू, माँँ की अहम हैसियत।
बिन बेटी के इस सुख से, घर है सुनसान बताएँँ
।।
बेटी घर का है उजियारा……'

बिन बेटी के ना मनते, घर में कोई त्‍योहार।
ना हो पाते राखी, भैया दौज, कई व्‍यवहार।
घर की शोभा है बेटी, बहिना यह ज्ञान कराएँँ।।
बेटी घर का है उजियारा……'

इन्‍हें पढ़ाओ, इन्‍हें बचाओ, बेटी को हर सुख दो।
है भविष्‍य की बागडोर इनसे, इनको ना दु:ख दो।
देगी यह आशीष, बढ़ाएगी, कुल परम्‍पराएँँ।।
बेटी घर का है उ‍जियारा……'

बेटी बाबुल का गहना, ससुराल की शान शराफ़त।
दोनों घर की लाज निभाए, करती सदा हिफ़ाज़त।
बेटी नारी शक्ति का प्रथम, है सोपान बताएँँ।।
बेटी घर का है उजियारा……'

चलो साथियो, मिल के घर-घर, इक अभियान चलाएँँ।
बेटी घर का है उजियारा, यह संज्ञान कराएँँ।।

Views 99
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
Posts 54
Total Views 850
1970 से साहित्‍य सेवा में संलग्‍न। अब तक 13 संकलन, 6 कृतियाँँ (नाटक, काव्‍य, लघुकथा, गीत, नवगीत संग्रह ) प्रकाशित। 1993 से अबतक 6000 से अधिक हिन्‍दी वर्गपहेली 'अमर उजाला' व अन्‍य समाचार पत्रों में प्रकाशित। वर्तमान में ई पत्रिका 'अभिव्‍यक्त्‍िा-हिन्‍दी-ऑर्ग' पर 2010 से हिन्‍दी वर्ग पहेली निरंतर प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia