बेटी को आगे बढ़ने दो

आनन्द कुमार

रचनाकार- आनन्द कुमार

विधा- कविता

बेटी को आगे बढ़ने दो
पढ़ने दो इसे पढ़ने दो,
बेटों को जो सुख साधन दिये
बेटी इससे वंचित क्यों ?
बेटी को आगे बढ़ने दो ।

अपनी सोंच को बदलो
इसे चौक-चूल्हे मे ही न रहने दो
समानता का अधिकार है इनका
बेटी को आगे बढ़ने दो ।

एक बेटी को शिक्षित करोगे तो
पूरा कुल शिक्षित होगा
इस कहावत को सही साबित होने दो
बेटी को आगे बढ़ने दो ।

अरे ! अपनी मानसिकता बदलो
कि पराया धन है बेटी
धन है बेटी इस बात पर गौर करो
जब ब्याह कर जायेगी प्रियतम घर
उसको सम्मान तो मिलने दो
बेटी को आगे बढ़ने दो ।

आँखों में ओलम्पिक का सपना संजोने दो
जब गोल्ड मिलेगा भारत को
देश का सम्मान बढ़ाने दो
बेटी को आगे बढ़ने दो ।

पढ़-लिखकर आगे बढ़कर
और वैज्ञानिक बनकर
देश का सम्मान बढ़ाने दो
बेटी को आगे बढ़ने दो ।।
-आनन्द कुमार

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आनन्द कुमार
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आनन्द कुमार पुत्र श्री खुशीराम जन्म-तिथि- 1 जनवरी सन् 1992 ग्राम- अयाँरी (हरदोई) उत्तर प्रदेश शिक्षा- परास्नातक (प्राणि विज्ञान) वर्तमान में विषय-"जीव विज्ञान" के अन्तर्गत अध्यापन कार्य कर रहा हूँ । मुख्यत: कविता, कहानी, लेख इत्यादि विधाओं पर लिखता हूँ । इनके माध्यम से जीवन की निरन्तरता, मौलिकता, अपने विचारों एवं भावनाओं को रखने का प्रयास करता हूँ ।

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